महीनों से चली आ रही खोज के बाद NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने आखिरकार चंद्रयान-2 मिशन में इस्तेमाल विक्रम लैंडर (Vikram Lander) की दुर्घटनाग्रस्त साइट की तस्वीरें लेने में कामयाबी हासिल की है।

दरसल जहाँ एक ओर LRO इस जगह की तस्वीरें हासिल करने में कामयाब रहा, वहीं भारत के एक इंजीनियर ने इन तस्वीरों के जरिये दुर्घटनाग्रस्त साइट को पहचानने में मदद की।

आपको बता दें ये तस्वीरें विक्रम लैंडर द्वारा सतह पर टक्कर की जगह को साफ दर्शाती नज़र आ रहीं हैं। तस्वीरों में नज़र आ रहा ‘ग्रीन डॉट्’ अंतरिक्ष यान के मलबे की पुष्टि या कहें तो संभावनाओं की ओर संकेत करता है।

वहीँ ‘ब्लू डॉट्स’ आपको टक्कर के दौरान अंतरिक्ष यान के छोटे-छोटे टुकड़ों के बिखरने से सतह पर बने निशानों की ओर संकेत कर रहा है।

वहीँ “S” शंमुगा सुब्रमण्यन द्वारा पहचाने गए मलबे को इंगित करता है। यह भाग नैरो एंगल कैमरा से 11 नवंबर को ली गई M1328074531L/R और M1328081572L/R तस्वीरों के जरिये सामने आ सका है।

वहीँ NASA के अनुसार Lunar Reconnaissance Orbiter Camera टीम ने 26 सितंबर को इस साइट की पहली सिलसिलेवार तस्वीरों को जारी किया था, जो 17 सितंबर को ली गईं थीं।

इसके बाद ही शंमुगा सुब्रमण्यन ने मलबे की पहचान के एक सकारात्मक पक्ष के साथ LRO प्रोजेक्ट टीम से संपर्क किया था।

कहा जा रहा है कि इस टिप को प्राप्त करने के बाद LROC टीम ने पहले और बाद की छवियों की तुलना करके इस पहचान की पुष्टि की थी।

जब पहली बार इन तस्वीरों को हासिल किया गया, तब प्रभावित साइट स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सकी थी और इसलिए इसे आसानी से पहचाना नहीं जा सका था।

इसके बाद 14 और 15 अक्टूबर के दो-दो इमेज सीक्वेंस हासिल किए गए थे। 11 नवंबर को LROC की टीम ने इस साइट के आसपास के क्षेत्र को छान मारा और प्रभावित स्थल (70.8810 ° S, 22.7840 °E, 834 मीटर ऊंचाई) में मलबे को ढूंढ निकाला।

आपको बता दें कि नवंबर में प्राप्त इन छवियों के पिक्सेल स्केल (0.7 मीटर) सबसे अच्छे रहे और साथ ही इसमें प्रकाश की स्थिति (72 ° इन्सिडेन्स एंगल) के साथ काफी बेहतर रही।

1 comment
प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *