आपको शायद याद हो कि Twitter ने करीब दो हफ़्ते पहले ही अपने प्लेटफ़ॉर्म पर राजनीतिक विज्ञापनों को बैन करने संबंधी ऐलान किया था।

हालाँकि यह एक हैरान करने वाला कदम जरुर था, और शायद इसलिए इसने दुनियाभर में काफी सुर्खियाँ भी बटोरी।

लेकिन अब Twitter ने आधिकारिक रूप से यह ऐलान किया है कि राजनीतिक विज्ञापनों को बैन करने के प्रस्ताव व नियम को अब प्लेटफ़ॉर्म पर लागू कर दिया गया है।

आपको बता दें कंपनी ने उम्मीदवारों, पार्टियों, सरकारों या अधिकारियों, PAC और कुछ राजनीतिक गैर-लाभकारी समूहों को प्लेटफ़ॉर्म पर किसी भी प्रकार के राजनैतिक कंटेंट के प्रचार से बैन कर दिया है।

दरसल इस नई नीति के पीछे का कारण भी कंपनी ने बताया है। Twitter के अनुसार कंपनी यह मानती है कि राजनीतिक संदेशों की Reach “अर्जित की जानी चाहिए, खरीदी नहीं”।

इस बीच आपको बता दें कि Twitter के यह नए नियम विश्व स्तर पर सभी प्रकार के राजनैतिक विज्ञापनों को लेकर लागू होते हैं।

हालाँकि हम आपको यह भी साफ़ तौर पर बताना चाहेंगें कि Twitter कहीं से भी राजनीतिक कंटेंट पर प्रतिबंध नहीं लगा रहा है, यह सिर्फ़ ऐसे कंटेंट को पैसों से बूस्ट करके प्रमोट करने से रोकने का प्रयास कर रहा है।

दरसल इस फैसले के ऐलान के वक़्त कंपनी के सीईओ जैक डोरसी ने ट्वीट किया था,

“इंटरनेट विज्ञापन कमाई के साथ ही साथ लोगों तक पहुँचने के लिए भी एक प्रभावी साधन हैं, लेकिन यही बात इसको राजनीति के सन्दर्भ में जोखिम से भरा भी बनाती है।”

वहीँ दिलचस्प रूप से हाल ही में ही Facebook ने राजनीतिक विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने की किसी भी संभवना से इनकार कर दिया था। दरसल सोशल मीडिया पर राजनैतिक विज्ञापनों को लेकर प्रतिबंध पर भी 2020 के चुनाव के लिए अमेरिका के राजनीतिक गुटों में दो मत नज़र आ रहें हैं।

साथ ही इस बारे में सवाल पूछे जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव अभियान के प्रबंधक ब्रैड पार्स्केल ने कहा कि सोशल मीडिया पर राजनैतिक कंटेंट पर प्रतिबंध की माँग महज़ ट्रम्प और उनकी विचारधारा का समर्थन करने वालों को चुप कराने के लिए विपक्षी गुटों द्वारा किया जा रहा एक प्रयास है।

हालाँकि Twitter ने इस प्रतिबन्ध से समाचार संगठनों को दूर रखा है जो राजनीतिक मुद्दों के कवरेज को अक्सर प्रमोट करते नज़र आते हैं। दरसल Twitter ने न्यूज़ और “Cause-Based” कंटेंट को गैर-राजनीतिक माना जाता है।

हालाँकि यह छूट बहुत स्वाभाविक नज़र आती है। भले ही कई समाचार संगठन अक्सर किसी न किसी राजनैतिक गुट के पक्षकार नज़र आते हैं, लेकिन फ़िलहाल आदर्श और सार्वजानिक तौर पर वह दुनिया में राजनैतिक हालातों को दिखाने वाले माध्यम ही हैं।

हालाँकि प्लेटफ़ॉर्म ने समाचार संगठनों को लेकर भी कुछ शर्ते रखी हैं, जैसे सिर्फ़ उन्हीं संगठनों को ऐसे विज्ञापनों की सहूलियत दी जाएगी, जिनकें पास मासिक रूप से 200,000 यूनिक विजिटर्स होंगें और वह लोगों के समूह संबंधी मुद्दों को बूस्ट करते हों, न कि सिर्फ़ किसी एक विषय को लेकर ध्यान केंद्रित करते नज़र आए।

 

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