SpaceX के सीईओ Elon Musk ने बार फ़िर से मंगल ग्रह पर जीवन को बसाने की संभवनाओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया है।

दरसल इस बार Musk ने मंगल ग्रह पर एक स्थाई शहर के निर्माण पर लगने वाले वाहनों और समय के बारे में विस्तार से बात की। इसके साथ ही उन्होंने मंगल ग्रह पर स्थाई शहर बसाने को लेकर एक बार फ़िर से चर्चा शुरू कर दी है।

लेकिन इस बार Twitter पर अपने फैंस के सवालों का जवाब देते हुए Elon Musk ने इस बार इसको लेकर काफी दिलचस्प बयान दिए, जिससे इसको लेकर उनकी स्पष्ट सोच भी साफ़ नज़र आई।

दरसल इस हफ़्ते कैलिफोर्निया में अमेरिकी वायु सेना के Startup Pitch Day इवेंट में दिए गये अपने बयान को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में Musk ने कहा कि मंगल पर एक स्थाई और अनुकूल शहर के निर्माण के लिए जरूरी स्टारशिप के प्रति उड़ान की लागत करीब $2 मिलियन तक हो सकती है।

लेकिन दिलचस्प रहे इस विषय को लेकर उनके द्वारा रखने सामने रखे गए अन्य आँकड़े, जैसे कि आगे Musk ने कहा कि उनकी कंपनी SpaceX के अनुसार इस मिशन के लिए लगभग 1,000 स्टारशिप की जरूरत पड़ेगी।

आपको बता दें ये स्टारशिप मंगल पर बुनियादी सामान ले जाने के साथ-साथ लोगों के आने जाने के लिए भी इस्तेमाल की जायेंगी। और अगर इस हिसाब से देखा जाए तो Musk के अनुसार इतनी स्टारशिप तय काम को लगभग 20 सालों में पूरा कर पायेंगी।

ऐसा इसलिए भी है क्यूंकि अगर प्रैक्टिकल तौर पर बात की जाए तो कई कारणों के चलते मंगल ग्रह पर ऐसी उड़ान की अनुमति हर दो साल में सिर्फ़ एक बार ही मिल सकती है।

हालाँकि इसके साथ ही Musk ने स्टारशिप की और भी जल्द से जल्द उड़ान भर सकने का भी जिक्र किया, जो हर स्टारशिप द्वारा पृथ्वी के ऑर्बिट तक ले जा सकने वाले पेलोड क्षमता पर निर्भर करेगा।

जानकारों की माने तो इन स्टारशिप के डिज़ाइन को ऐसा रखा जाएगा ताकि इन्हें बार बार इस्तेमाल किया जा सके। वैसे Musk का तो कहना है कि आदर्श स्थिति में ये स्टारशिप प्रति दिन तीन बार तक उड़ान भर सकने में सक्षम होंगे।

अगर इस हिसाब से देखें तो प्रति वर्ष एक स्टारशिप करीब 1,000 से अधिक उड़ानें भर सकेगा। और अगर एक हिसाब के मुताबिक अगर SpaceX अभी मौजूद Falcon Rockets के बराबर की संख्या (करीब 100) के बराबर भी इन स्टारशिप का निर्माण करता है, और हर स्टारशिप Falcon की तरह 100 टन तक अक पेलोड ले जाने की क्षमता रखता हो, तो ऐसे में कंपनी एक साल के अन्दर ही करीब 10 मिलियन टन पेलोड को पृथ्वी की कक्षा में पहुँचा सकेगी।

वैसे वाकई में इतना पेलोड काफ़ी ही होगा। यहाँ तक कि कई जानकारों का दावा है कि इतना पेलोड जरूरत के हिसाब से ज्यादा ही होगा।

हालाँकि यह सभी प्लान तब का है जब Musk की कल्पना के हिसाब से पृथ्वी का ऑर्बिट एक तौर से ऑर्बिटल कार्गो और मंगल व चाँद पर जाने वाले अंतरिक्ष यानों के लिए एक ऐसी जगह का काम करेगा जहाँ वो सामान ट्रांसफर करने से लेकर, ईंधन भर खुद को आगे की यात्रा के लिए तैयार कर पायेंगें।

खैर! इन सब के बीच एक सच यह भी है कि मंगल ग्रह पर एक स्थायी कॉलोनी बनाने से पहले वहां इंसानों को सही सलामत पहुँचाने वाले यान को तैयार करना और उसके बाद वहां अंतरिक्ष यात्रियों की उचित लैंडिंग इत्यादि को भी संभव बनाना।

इस बीच आपको बता दें NASA ने अपने इन्हीं लक्ष्यों के साथ 2024 में एक मिशन का ऐलान किया है।और SpaceX ने भी कहा है कि वह 2022 तक स्टारशिप को लांच करने के प्रयास करेगा ताकि उस लैंडिंग की तैयारी में मदद मिल सके।

यह सब सुनने में भले अभी भी कल्पना लगे लेकिन अगर आप गौर करेंगें तो देखेंगे की आज के समय में कई तकनीकें मौजूद हैं, जिनका भले हमारे आम जीवन से कोई सरोकार न हो, लेकिन वह ऐसे मिशन को पूरा करने की क्षमता रखती हैं और इसलिए साइंस पर शक करने की बजाए इस पर कम और भरोसा रखने की जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.